इसे सही रूप से परिभाषित कर आनन्द लीजियेजिन्दगी रस है, संगीत है, आलोकित कीजिए
गास्पेल (Gospel) – बाइबल में JESUS शब्दों की वाणी को, शब्दों के धागे में इस तरह पिरोया गया था कि हर शब्द मानव की जिन्दगी के हर पहलू को छूकर उसे, चिन्तन से दूर रख सुख की परिभाषा बताता है और सिखाता है कि, जिन्दगी ईश्वर ने हंसने व हंसाने के साथ आपस में मिलकर इसे एक खुशमय बनाये जहाँ दुख की जगह नहीं। यह तभी हो सकता है जब सभी एक जैसा सोचे एवं ईश्वर के दिये शब्दों का मनन हमेशा करते रहें, जिससे, आपके अपने वालों का दुख एवं मुसीबत आप समझ सकें एवं उसे दूर करने के लिए उसका साथ दें एवं अपने सुख में शामिल कर लें। परिभाषा सुख व दुख की अलग होती है और वह व्यक्ति व व्यक्तियों के समूह के साथ अलग-अलग होती जाती है। इसलिए आप जिस समूह, मोहल्ला, समाज, शहर में रहते हैं और आपस में जानते है, तभी आप उसके दुख-सुख को समझ कर उसके साथ, उसके दुख को समझ, उसे उचित सलाह दें, कुछ दिनों तक अपने समूह में शामिल कर, एक भावनात्मक शक्ति एवं अपनेपन का अहसास दें। उसके दुखांे को समझ, सुख का आभास दे सकते है। समाज एवं समूह नितांत आवश्यक है जीने के लिए। परिवार पहला समूह होता है और बाद में समूह बदलते जाते है, लेकिन सभी आसपास के समूह की सोच एक जैसी होती है तब मुख्य धारा में सभी एक ही विचार व सोच के साथ एक दूसरे का सहारा बन जाते हैं।
यही कारण है कि हर देश, समाज में कुछ पीढ़ियों पहले लोग बाहर जाने से डरते थे क्योंकि अपने ही गांव व समाज में सुरक्षित पाते थे। आज समय बदल गया है और हर समाज, शहर व देश, हर तरह के लोगों के आवागमन, से जो व्यापार और पढाई से संबंधित होता है, अत्यधिक संख्या में है। यह समय व सामाजिक मजबूरी होती है। हर व्यक्ति व देश तरक्की की राह पर चलता है जो उसे अन्य जगहों पर ले जाकर उसे आगे बढने का मौका देता है। ईश्वर की आस्था व मार्गदर्शन भी यह सिखाता है, पर – मानवता के प्रति प्रेम व आदर के भाव के साथ, एक हो, एक दूसरे की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें, इसे दर्शाता है, ईश समझ यही है। इसे ग्रहण कर आगे बढ़े और दूसरों को भी आगे बढ़ने में मदद करें।
कृष्ण ने भी यही बातें समय समय पर की एवं गीता व अन्य सभी धार्मिक ग्रन्थ यही कहते है। इसका सीधा सम्बन्ध पुराने समाज व उसकी व्यवस्था संस्कार व राजधर्म व अन्य प्रचलित मान्यताओं व प्रभुत्व प्रवृतियां, सभी मिल एक ज्ञानरुपी शिक्षा को जीवन का आधार बनाते है एवं समय से प्रतिबद्ध रह सुखी जीवन का निर्वाह करते हैं। कृष्ण के मार्गदर्शन में सभी को ईश्वर की अनुभूति के साथ एक सही संरक्षण व खुशी का अहसास होता है। यह तभी, जब श्रीकृष्ण द्वारा गीता में कहे हर शब्द व वाक्य के अनुसार जनता अनुसरण कर एक दूसरे को श्रृद्धा व भक्ति के मार्ग पर चल, एक दूसरे का आदर व सच्ची भावनाओं के साथ समाज में रह प्रेम संबंध से बंधे रहें। यह सम्बन्ध ही एक दूसरों की मदद एवं दुखों को दूर करने का मार्ग होता था।
यह सच्चा सम्बन्ध ही अगर एक बार – मन में घर कर जाये, तब लोगों के दुख का सार अपने आप समझ में आ जाता है एवं उसे उसी तरह, प्यार की भाषा और दयामय हाथ से धीरे धीरे दूर कर सकते हैं। दुख कई प्रकार के होते हैं। सबसे कू्रर दुख पहुंचाने वाला पारिवारिक ही होता है जहाँ बुजुर्ग एवं बढ़ती उम्र के असहाय लोग परिवार में बोझ समझे जाते हैं जबकि उन्हीं के प्रयासों से, उन पर निर्भर हो, पढाई या व्यवसाय में सफल होते हैं। जबकि दूसरा परिवार हर परिस्थितियों में बुजुर्गों के साथ सभी परिवार के लोगों का हर परिस्थिति में ध्यान रखते हुए आगे बढ़ते हैं। यह एक बड़ा समय होता है जब हमारा बचपन साथ में बीतता है और एक दूसरे का साथ निभाना व धैर्य से काम कर एक दूसरे के साथ रह, खुश हो हर कार्य को मिलजुल कर सरल बना, सफल करना होता है। बड़ेपन में भी यह प्यार और साथ की अनुभूति हमेशा हर-अच्छे कार्य के लिए प्रेरित करती रहती है।
कृष्ण के हर कार्य समाज के सभी लोगों को लेकर एक साथ चल, अच्छी-अच्छी परम्परा डाल कर हर व्यक्ति को सम्मान देना और अच्छे कार्य करने की प्रेरणा देना है। गलतीयां सभी से होती है, लेकिन जब भाव प्रधान, समाज का निर्माण होता है, वहां लाभ या हानि नहीं, जो कि भावों के तौल में बहुत छोटी होती है।
सभी को संसार का गुणा भाग सिखाना एवं व्यावहारिक पथ पर चल सभी से मिलजुल कर सही कार्य कर रोज ही उत्सव मनाना है। जहां प्यार है वहां खुशी है और वही उत्सव है। आज व्यावहारिक तौर पर हर व्यक्ति व्यवस्थाआंे एवं सामाजिक जटिलता व व्यवसायिक र्स्पधा के कारण मानसिक तौर पर उससे जूझता रहता है और छोटी छोटी खुशीयों को भूल कर, हर कार्य का मूल्य निकाल, उसी में दुखी रहता है। कृष्ण ने गीता में कई जगह, अनुभवों की सारबद्ध शिक्षा दी है। भाई, बहन, अपने सम्बन्धी आदि तथा परिवार से खुशी की परिभाषा को पुनर्जीवित कर आनन्द लेते हैं। खुशी के दो शब्दांे की मिठास, जीवन के हर क्षण में एक दूसरे की मदद कर उन सभी को सुख का अहसास कराते हैं। यही सोच है, यही व्यवहार है, यही सभी को बांधने का तरीका है। खूब काम करो, दूसरों की गलती को बताओ और समझाओ तथा उन्नति का मार्ग दिखाओ। इस जीवन की नदिया में जाने कहां आपकी नाव भी झकझोले खाने लगेगी मालूम नहीं। तभी एक तैरता हुआ मुन्ना, आपकी गिरी हुई पतवार को आपको पकड़ा देता है यही जीवन का रहस्य है।
आज की जिन्दगी में यह सुख और प्यार की परिभाषा, भूल चुके हैं। काम, प्रतिस्पर्धा, और हम। यही जीवित सिद्धान्त बनता जा रहा है। घर के अन्दर मन की बातें, मनभावन कार्य, एक थाली में दो लोगों का साथ खाना। समय पड़ने पर अपने सभी कार्यों को छोड, एक जरूरतमन्द का साथ देना ही ईश्वर को धन्यवाद देने जैसा है क्योंकि उसे यह अवसर उसी ने ही दिया है।
सच, एक शब्द गुम हो चुका है। दोस्तों, सगे सम्बन्धियों के बीच खडे़ होकर बातें सुने, तो बहुत खुशी होती है। अच्छा लगता है कि लोग कितने प्रेम से मिलते हैं बातें करते हैं, सुख-दुख सांझा करते हैं और मदद करने का आश्वासन देते हैं। हम सब एक हैं और एक रहेंगे। समय बदलता रहता है। ऐसी अच्छी-अच्छी बातें कर, उस समाज की एक अच्छी प्रस्तुती देकर, सभी गर्व करते हैं। अंत में कई लोग झूठे आश्वासनों से दुखी हो जाते हैं। विश्वास शब्द से नफरत होती जाती है और अकेले में सभी बिखरे-बिखरे नजर आते हैं। यह क्रिया एक बार शुरु होती है तब कभी भी खत्म नहीं होती है। ईश्वर यही हिदायत देता है – पतवार – सच एवं सत्य की होती है और सही राह बताती है। अपने आपको समझो। आपके सभी साथी, मिलने वाले, अलग-अलग विचारों, कार्यों एवं कार्य पद्धती से जुडे हों और परिस्थितिवश भटक गये हों। ऐसे समय सभी को मिल एकजुट हो सरलता से कार्यों को सही रूप में सोच समझ कर पूरा करें एवं आगे बढ़ें। परिस्थितियां बदलती रहती है। कितने भी सक्षम हो परिस्थितियों से समझौता करने की आवश्यकता होती रहती है। सक्षम एवं होनहार व्यक्ति भी अगर परिस्थिति से समझौता नहीं करता है ऐसे समय की थपेड़ ही उसे सही मार्ग दिखाती है।
सत्यता के शब्द – लोहे से भी कठोर एवं संबल हो, सहारा देते हैं। लेकिन सत्यता का प्रेम रूपी कठोर रूप – कभी भी नहीं झुकता है और न अपने मार्ग से भटकता है। यह जीवन्त है और सामयिक भी। रास्ता दिखा रहा है, बस आँखो के सामने की परछाइयों को साफ कर उसकी मार्मिकता को उसके दिमाग तक जाने दो।
जिन्दगी एक प्यारा भरा अहसास है। एक कविता है, एक संगीत है। हर क्षण इसकी नई नई धारा, नए शब्दों के साथ कहां कहां, आपको पहुँचाती है, शायद यह भी आप नहीं जान सकते। सुमधुर हवा का झोंका व भावों की अभिव्यक्ति गूँज रही है. सुनने वाला चाहिए। राह में एक तार का वाद्य लिए एक गरीब जिन्दगी का सत्य सुना रहा है क्या सुना आपने, जिन्दगी की सत्यता।
जिन्दगी सरल है इसे कठोर न बनाईये।

