साथ-साथ – उम्मीदों की आस

अंधेरी तरफ अंधेरा
एक पानी की बूंद की आवाज
लड़कों ने सुना खडे हो गये,
आगे बढ़े
कीचड़ में फंस गये
पीछे देखो आंसू बहाती महिलायें
एक ने हाथ आग बढ़ाया
लड़कों ने पकड़ा, और साथ ले आये
कई आदमी देख
मुड़ने लगे,
बच्चों की आवाज सुन
मुड़न का,
बच्चों की आवाज सुन
आगे बढ़े
कीचड बहुत था
हिम्मत भी नहीं थी
औरतों ने हाथ पकडा
आगे आई
बच्चों ने घेरा
आगे बढ़ाया
हाथ पकड़ कर
मुठ्ठी बांधी
सब जुडे मुठ्ठी से
हिम्मत आई
पैरों में जोर
और हिम्मत आई
सभी की मुठ्ठी, सभी काी हिम्मत
कीचड़ को छोड़
रास्ते पर आई
बच्चे ने देखी झलक
धीमी रोशनी की
दूर रास्ते पर
सूरज की गरिमा की
जीवन की उम्मीद बंधी
बच्चे चिल्लाये
मुठ्ठी बांधे बढ़ते रहे
सूरज ऊपर उठा,
बांह उठाये, आव्हान किया
आगे बढ़ो
मुठ्ठी की पकड़
मुट्ठी थी पकड़
सभी का होंसला
रोशनी की झलक
और मन की ललक
जिन्दगी की आस
और सभी का साथ.
बढ़ते चलो
बच्चो की मुठ्ठी
बांधा सबको
औरतों ने की दृढ़ता
हिम्मत और लगनता
बनी मिसाल, रोशनी अंधेरे में
उनकी खनक और
पल्लू का ढांढस,
सभी को बांधा, एक जोड़ में
चलो, चलते रहो, छोड़ों मत
आगे बढ़ो।
रास्ता दिखा, नहर दिखी
जिन्दगी की आस और बढी
सभी के भाव बदले
और बदले सभी के हालात
जीवन यही है।
पानी, रोशनी ही उर्जा है
उसे काम करने दो
सभी हालात समझ
समझोता कर
आनन्द से उर्जा ग्रहण करो
शक्ति है, संजोओ
नतमस्तक हो, गरूर छोड़ो
चारों तरफ देखो
ईआईएसटी
चारों तरफ देखो
और मिलकर साझा करो
बहुत है इस धरती और पेड़ों में
समझो, छुओ, स्पर्श कर
धन्य हो।
यही मां है।
सच्चे हृदय एवं दिमाग से
इसकी लाज रखो।
भूखे नही रहेंगे।
कभी कमी नहीं होगी, पर आप को
साथ रह, समय रह, खुशी की झोली को पूजो।
मुसीबत में साथ, प्यार को
बढ़ाओं खुशी आपको बिना दिखे
वैभव का साथ कराएगी।

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दिये की लौ को देख तले को नहीं
गरीब के दर्द को देख कपड़े को नहीं
बने रोशनी हम सभी की
तोडें न विश्वास हम कभी भी
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हम खुद को पहचानते नहीं
दूसरों की पहचान को जानते नहीं
जो नहीं चाहते हैं उन्हें ढूंढते रहते है
सही पहचान छोड़, परछाई के पीछे भागते रहते हैं।
सच्चाई