9 जुलाई, 2017
गुरु हमारे अन्दर हैं
डा. सतीष शुक्ला
गुरुभ्यो नमः
हमारी अंतरात्मा में हमारे अपने गुरु का वास है, जो हमें हर क्षण इस भौगोलिक एवं आध्यात्मिक जगत के हर पहलु से अवगत कराते रहते हैं। हमें अन्तर्चक्षु से संसार की सभी योनियो के दर्षन कराता है और सही रूप से हर पल सही और बुरे की पहचान बताता है। हमें उनकी बात सुन उस पर अमल करना चाहिए लेकिन ज्यादातर उनकी आवाज स्वयं की आकांक्षाआंे और अहम में खो जाती हैै या सुनकर भी अनसुनी कर दी जाती है। उनकी आवाज सुनने के लिए भी हमें तैयार होना चाहिए। स्वतः अन्तर ज्ञान द्वारा मन को शांतचित कर अगर मनन करें, ध्यान लगायें तो गुरु की दर्षन भाषा अवष्य सुनाई देगी। यह सात्विक है, सच है, समझने वाला चाहिए।
बच्चा पैदा होते से ही, रोता है, पलटता है, अंगुठा चूसता है, भूख को समझ रो कर आवाज देता है। धीरे-धीरे शारीरिक बढ़त, बौद्धिक प्रगति, अन्तर गुरु द्वारा ही होती है। स्कूल काल में अध्ययन कर विभिन्न विषयों का ज्ञान लेता है, पर उस ज्ञान में निहित अन्तरंग ज्ञान, अन्तर गुरु सिखाता है और आपकी क्षमता को उभार संसार के सामने रखता है। आपको सही जिन्दगी और इसके कठिन मार्ग पर चलने की राह दिखाता है। कठिन समय में अहंकार भरे मार्ग पर राह दिखा सही मार्ग चुनने की सलाह देता है। सुनिये और आगे बढिये सफलता अवष्य मिलेगी।
सपना सुनहरा होता है पर वास्तविक नही है। किन्तु कृत्य सच मालुम होते है। यह सपने उस ओर इषारा करते हैं जहाँ अनुभूति, बिना शरीर के होती हैै। कई बार कार्य करते-करते कुछ अलग अनुभव होता है। और आप अपने कार्य में या तो बदलाव लाते हैं या बदल देते है। यही अन्र्तमन की आवाज है। जो अन्तर गुरु हमें सही राह चलने की सलाह देते हैं। बच्चे के जन्म के साथ हमारी अंतरात्मा साथ रहती है और मृत्यु के साथ चली जाती है। इस बीच के समय में आप अपनी अंतरात्मा के साथ रहते हैं जो आपके गुरु की तरह सलाह देती रहती है। मृत्यु के बाद दूसरा शरीर धारण कर उसे राह दिखाती है। यह संासारिक रंगमंच है जहाँ हम भूमिका करते है और दूसरों की भूमिका के समय स्टेज उसे दे देते हैं। यही सत्य है। अनुभव कर गुरु को पहचानिये, मनन करिये और उसकी आवाज को समझिये। ध्यान और मनोयोग से इसे आप पहचान कर जिन्दगी सार्थक कर सकतें हैं।
बाइबल में लिखा है गरीब व्यक्ति पर ईष्वर का आषीर्वाद रहता है और स्वर्ग में उसकी जगह होती है। क्योंकि वह सात्विक है, ईष्वर के दिये मार्ग पर चल, गरीब परिस्थितियों में भी सबका साथ निभाने की कोषिष करता है। उसकी निगाह में वही स्वर्ग का हकदार है।
कबीर अपनी जीविका कपडे़ बुनकर करते थे और सेवा में लीन रहते थे। राजा जनक के पास धन धान्य था और वह भी प्रजा की सही रुप में सेवा में लगे रहते थे। दोनो ही सेवा का आनन्द ले समाज को सही दिषा देते थे। यहाँ पैसा रोड़ा नही है। अपने अन्तर्गुरु की आज्ञा का पालन कर ईष्वर की धरती पर उसके बनाये मनुष्य की सेवा में लीन रहते थे और सही रुप में सुख का अनुभव करते थे। यही जीवन का सुख है। पैसा एक माध्यम हो सकता है गुरु के आदेष का पालन करने में, पर आवष्यक नहीं।
बिलगेट्स और उनकी पत्नी मलिण्डा (माइक्रो साफ्ट के संस्थापक) ने गेट्स फाउन्डेषन की स्थापना की है और अपनी ज्यादातर सम्पत्ति उसमें दान कर अत्यन्त सुख का अनुभव कर सारे संसार में गरीबों की सेवा कर रहे हैं। जिनका कोई नहीं उनका भगवान होता है। और वह ही किसी न किसी रूप में संसार में विभिन्न रूप ले, उनकी मदद करता है। अमीर होना पाप नही है, लेकिन किसी के दुख को अनदेखा कर सिर्फ खुद के बारे में ही सोचना, उसका नियम नहीं हैं।यही आपको मार्ग दर्षन देकर सुख का अनुभव कराता है।
गुरु नानक, का जन्म 15वीं शताब्दी में हुआ था और इस युग के सबसे बड़े सन्त हंै और सिख पन्थ के निर्माता है। ईष्वर के प्रति अपार श्रद्धा में लीन, तीन दिन के अन्तध्र्यान ने उन्हे प्ररित किया समाज को नई दिषा देने के लिए। उन्होंने ईष्वर के नियम, ध्यान, एकाग्रता, एकता, भाई चारा, सभी का आदर, सभी को न्याय, सहिष्णुता, सादगी में एकता और मानव सेवा कर्म की प्रधानता और सही ज्ञान का प्रसारण किया यही हमारी आत्मा, अन्तर्गुरु भी कहते हैं, पर हम सुन नहीं पाते हैं। गुरु नानक जैसे संत और ज्ञानी हमारी अंतरात्मा को जगा, गुरु ज्ञान की वाणी सुनाते हैं। यही सुख का मार्ग होता है। दुःख सुख जिन्दगी का हिस्सा है, धैर्य रखिये समय बदलता है और आपको गुरु हिम्मत दे आषा की ओर ले जाता है।
मित्रों, अपने अन्तर्गुरु को पहचानिये उसकी गुरुवाणी को चिन्तन कर सुनिये और इस संसार को सुखमय बनाइये और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण में सभी के साथ प्रेम से रहिये।
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