ग्लैमरस माॅडल बन गई नन

जीवन में कब कोई व्यक्ति भाव बदल अपने व्यक्तित्व को पूरी तरह नकार कर समाज को नई प्रेरणा देगा, कभी नहीं कहा जा सकता। मानव जीवन की विवशतायें और विकटताएं मनुष्य को मजबूर कर नए सोच की और प्रेरित करती है और ऐसा बदलाव लाती है कि वह समाज सुधारक हो एक स्तंभ बन जाता है और लाखों के जीवन को नई राह देता है। इतिहास गवाह है कि किस तरह महात्मा बुद्ध ने राज छोड़ बौद्ध धर्म की स्थापना मनुष्य को शांति देने के लिये की। सम्राट अशोक ने राह बदली। महावीर जी ने नए युग की स्थापना की। गुरू नानक ने एक नई जीवन की व्याख्या कर लोगों को प्रेम व समर्पण के साथ लोगों को जोड़ा और जीने की राह दी। यही प्रेरणा हर व्यक्ति अंदर आती रहती है और व्यक्ति अपनी सभी सुख-सुविधा को छोड़ धर्म के मार्ग पर चलने लगता है। जैन समाज मे ं अक्सर ऐस े अवसर देखे गये हं।ै

कुछ दिन पहले ही मशहूर ब्रिटिश इण्डियन माॅडल सोफिया हयात जो अपने अंदाज के कारण विश्व में प्रसिद्ध है, अचानक नन बनने का निर्णय लिया और सभी सुख-सुविधा त्याग कर अपनी समस्त सम्पत्ति से इंग्लैण्ड में एक संस्थान खोल लोगों को आत्म विश्लेषण के लिये प्रेरित कर तिब्बती पद्धति से मन विकार को दूर कर शांति प्रदान करना है।

मां सुरैया – व पिता कश्मीरी प्रवासी जमरूद

फादर्स डे

एक दिन जो पिता को समर्पित है। पश्चिम देशों की परम्परा जहाँ कम से कम एक दिल साल में लोग अपने पिता को याद कर उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। भारत में यह दिन रोज होता है। पिता की सीख, नसीहत, प्यार और मार्गदर्शन हमेशा साथ रहता है। पिता की चाह होती है बेटा उसे ज्यादा कामयाब हा े आरै कठीन समय में वह परिवार का ढाल होता है।

पिता का स्पर्श ही व्यक्ति सबसे बड़ा अहसास होता है। एक छोटा बच्चा जिसके पिता का देहावसान जन्म के पहले हो गया था। पिता के हाथ के ग्लोव के स्पर्श से सोते हुए भी मुस्करा देता है। यह ईश्वरीय, अन्र्तआत्मीय बोध है, सच्चा दर्शन है।

आदित्य तिवारी, 28 वर्षीय साफ्टवेअर इंजीनियर अपने माता-पिता के साथ रहता है। अविवाहित है। शुरू से ही बच्चों का मोह जिसने मिशनरी होम में आर्फन बच्चों को देखा। एक सुन्दर-सा बालक पसंद आया, पर उसे डाउन्स सिन्ड्रोम था और हृदय में एक छेद। उसे कोई गोद लेने के लिये तैयार नहीं था। माता-पिता को समझा गोद लिया जिसकी जटिल प्रक्रिया थी। अ बवह दो साल का है और हाव-भाव समझता है। दिमाग की कमजोरी की वजह से वह दूसरे बच्चों जैसा नहीं हो पायेगा। तब मैंने यही सोचा कि सचमुच में अगर यह मेरा बेटा होता तब मैं क्या करता? मैंने उसके लिए भविष्य के सपने देखे हैं। उसे यही कहूँगा, शायद वह समझ नहीं पाये कि तुम, तुम रहो। दूसरों जैसे बनने की कोशिश कत करना। हर व्यक्ति अलग है। ईश्वर ने कुछ दुख दिये हैं तो अनगिनत दूसरे रास्ते भी खोले हैं। अपनी खिड़की से दूसरी दुनिया देखो और अपनी खुशी वाला रास्ता चुनों। जहाँ, जिस रास्ते पर जो मिले, खुश रहो। कदम बढ़ाओ, नई राह, नई रोशनी अवश्य तुम्हारा रास्ता देखेगी। दोस्ती करो और साथ-साथ आगे बढ़ सुन्दर भविष्य को निहारो। ईश्वर को धन्यवाद दो कि हम दो मिले हैं खुश हैं और साथ हैं।

महिला सशक्तिकरण

18 जून, 2016 की तारीख भारतीय वायुसेना के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखी जायेगी। तीन महिलायें पहली बार वायुसेना में फाइटर पायलेट की हैसियत से राष्ट्रपति से कमीशन प्राप्त करेंगी। कैडेट, अवनी चतुर्वेदी (रीवा-म.प्र.), मोहना सिंह (राजस्थान) और भावना कांटा (बिहार) फाइटर पायलेट बन देश के आसमान की रक्षा करेगी। एक साल के कठिन परीक्षण के बाद 2017 में कमीशन हो हवाई जंगी बेड़े में शामिल हो जायेगी।

मोहना सिंह के पिता वायुसेना में करेण्ट आॅफिसर हैं एवं दादाजी वायुसेना में भारवाहक जहाज के साथ थे। पारिवारिक वातावरण ने प्रेरणा दी और अपने सपने को पूरा कर परिवार व देश का नाम रोशन किया। भावना कांटा-बी.टेक कम्प्यूटर्स के बादर्, आइ. टी. कम्पनी में अच्छी जाॅब करने लगी। लेकिन वायुसेना में जज्बात ने आज इस मुकाम पर पहुँचाया। अवनी चतुर्वेदी की प्रेरणा कल्पना चावला हैं और सपना अंतरिक्ष उड़ान का, जिस कारण वायुसेना में पदार्पण कर जंगी जहाज बेड़े से जुड़ आगे उड़ान का सपना पूरा करने का हौंसला है।

नजरिया बदलने से ही महिलायें सशक्त होगी। भारतीय संस्कृति में महिलाओं का योगदान अभूतपूर्व रहा है। चाहे रानी लक्ष्मीबाई हो, या  माता अहिल्याबाई हो या कल्पना चावला हो। मां शक्तिपीठ भारत के चारों कोने में है और लाखों श्रद्धालुओं को प्रेरणा देती है। ज्ञान की देवी सरस्वती – सभी शिक्षण संस्थाओं व कार्यों में पूजी जाती है और मां लक्ष्मी – धन की संरक्षक हो हर घर में पूजी जाती है। आज के परिप्रेक्ष में हर पल कोई ना कोई महिला आगे बढ़ समाज में नई प्रेरणा देकर देश का नाम रोशन कर रही है।