कृष्ण के 5 उपदेश

(1) चिन्ता को कम करना –
हताश अर्जुन – युद्ध में अपने प्रियजनों को देख, हताश हो धनुष रथ पर रख बैठ जाता है।
कृष्ण – काग्नेटिव थैरेपी और स्ट्रक्चरिंग के जरिये समझाते हैं –
हर व्यवहार के पीछे कुछ अनकही भावनाएं होती है। इसके पीछे की सच्चाई के समझें कि आज उसका प्रभाव क्या है और आगे क्या होगा। इस सोच के साथ रिएक्ट करें। ऐसे में दिलों दिमाग को री-फोकस करें और विचारों का संयम के साथ सच्चाई को समझ री फोकस करें और निर्णय लें।


(2) सच्चाई का करें साक्षात्कार-
समस्या से मुंह मोड़ने से उसका हल नहीं निकलता।
आज का युग हर व्यक्ति का कार्य क्षेत्र एक युद्ध क्षेत्र है। युद्ध की बारीकियों को समझों। अपने कार्य की समस्त नीतियो को समझ, कार्य को आगे बढ़ाओ। सामने आने वाली परिस्थितियो को समझांे और अपने कार्य को‎‫ه‬‎ सही दिशा देकर सफलता प्राप्त करों। विषम परिस्थिति आने पर उपाय सोच आगे बढ़ों न कि डर कर पीछे हो जाये। कुछ देर के लिए पीछे हटना एक ेजतंजमहल हो सकती है भविष्य की अच्छाई के लिए एक सही सोच के साथ।


(3) समस्या पर नहीं लक्ष्य पर ध्यान रहें –
हर व्याक्ति अपने कार्य को लेकर जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा वैसे वैसे कुछ न कुछ समस्या आती रहेंगी। हिम्मत से सामना कर विजय पाये। जैसे-जैसे आगे बढ़ते रहेंगे, दुश्मन बढ़ते जायेंगे और उनका सामना करने का तरीका भी अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग होगा। अपना दिमाग सही फोकस कर परिस्थिति को न देख लक्ष्य को देख परिस्थिति से भय न खा कर उसे दूर कर लक्ष्य को प्राप्त करें।


(4) कठिन परिस्थितियों को ठीक से नहीं आंकना और भय से उसका सामना करता-
कठिन से कठिन परिस्थितियां भी उसे हल करना का रास्ता देती है। एक संतुलित दिमाग, सही सोच और समय को साथ लें, धीर-धीरे परिस्थिति का सही आंकलन कर और रास्ता साफ नजर आयेगा। तब सही निर्णय कर दृढ़ निश्चय और दृढ़ संकल्य के साथ कार्य को आगे बढ़ायें।


(5) जीवन शैली –
जीवन में हर व्यक्ति को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को समझ, उसको सही सोच के साथ, पूरा करना पड़ता है। जिम्मेदारी मनुष्य के जीवन का एक भाग है। इससे भागा नहीं जाता है बल्कि पूरा कर अपना लक्ष्य प्राप्त किया जाता है। परिवार और कार्यक्षेत्र, जिम्मेदारियों का बोझ समय और कार्य के साथ बढ़ता जायेगा। दृढ़ मन से सामना करें और सच्चाई के साथ पूरा करें। सफलता अवश्य मिलेगी। असफलता से दुखी न हो। कारण समझें और उसके अनुसार सही रास्ता चुन लक्ष्य हासिल करें। जिम्मेदारियां मनुष्य को परिपक्व करती है और अपने कार्य के प्रति दृढ़ व एकनिष्ठ बना सफलता दिलाती है।